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Happy World's woman's Day - જગતની નારીચેતનાને વંદન ✍️ મીના વ્યાસ , વડોદરા

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  પ્રેમથી દુનિયાને શણગારી તે તું, વખ્ત આવ્યે હાંક પડકારી તે તું દસ દિશાએ એકલી પહોંચી વળે, હામ હૈયામાં યે ધરનારી તે તું. દેવ ના નાથી શક્યા દાનવને તો, રક્ષવા એણે જે પોકારી તે તું. જેમણે માન્યું સ્વરૂપ લક્ષ્મી તણું માન મોભા સાથ સત્કારી તે તું. આ જગત તારું ઋણી રહેશે સદા, કૂખમાંથી જન્મ દેનારી તે તું. તું છે શક્તિ, તું છે ભકિત, તું જ તું, જોડ ના જડશે જગે, ન્યારી તે તું. આપમેળે સર ચરણમાં જઈ નમે, ધન્ય છે, વંદન તને, નારી તે તું. ************************* મીના વ્યાસ વડોદરા જગતની નારીચેતનાને વંદન 🙏

शीर्षक : कुछ ही देरी है | ✍️ रेखा प्रजापति - अहमदाबाद

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आज कदमों में कुछ तेजी है |  आज सांसे भी कुछ गहरी है |  दोपहर से आंखें राह तक रही है |  उसके आने में अब कुछ ही देरी है |  आज धड़कनों को भी कुछ जल्दी है|  बेवजह चेहरे पर मुस्कान बिखरी है|  शाम से नजर दरवाजे पर टिकी है| उसके आने में अब कुछ ही देरी है | आज खाने की थाली कुछ ज्यादा भरी है| कई दिनों से हथेली ठिठुर रही है | खामोश रात हमसे कुछ कह रही है | उसके आने में अब कुछ ही देरी है |   रेखा प्रजापति  अहमदाबाद  2/3/2021

शीर्षक - नाम ✍️ हेमा बाजपेई , अहमदाबाद

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कहने को तो हर इंसा का नाम हे मजहब में,   पर ना जाने क्यों अक्सर  नाम से ज्यादा काम से बुलाई जाती हूं मैं... ..  कहने को तो  हर शख्स की पहचान है  ये नाम,  पर ना जाने क्यों खुद से कभी रुबरु ना कराता ये  नाम....   कभी बाबा की बेटी तो कभी पति की पत्नी बन के रह जाती  हू में,  अब बोलो नाम का जिक्र भी कहां हो पाता है......  बोलते तो सभी है  तुम्हारा नाम ही तुम्हारी पहचान है, पर पहचान बनने से पहले ही एहसान तले दबा जाती हूं मैं.......  कहने को तो  नाम  एक डोर है जो थामे  बैठा हैं वो पल जो पहचान करवाना चाहता है खुद से,  पर रुसवा आंखों से कभी मुलाकात भी कहां करवा पाता है...  कहने को तो ये नाम नहीं इंसा की पहचान है पर खुद से रुबरु  होने भी कहां दे पाता हैं.......  हेमा बाजपेई अहमदाबाद

शीर्षक : घर में रहोना ! ✍️ रेखा प्रजापति - अहमदाबाद

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  खुद से मोहब्बत करोना जनाब घर में रहो ना,  खुशहाल कल की सोचो ना जनाब घर में रहोना!  अभी वक्त चल रहा है जहरीली हवाओं का,  इन हवाओं से डरो ना जनाब घर में रहोना!  वक्त नहीं देते यह शिकायत थी घरवालों की, तो अब शिकायत दूर करो ना जनाब घर में रहोना!  खुद की अगर परवाह नहीं तो ना सही, अपनों के लिए जरा ठहरोना जनाब घर में रहोना! मौके नहीं मिलते बार-बार देशभक्ति दिखाने के, तो देशभक्ति दिखाओ ना जनाब घर में रहोना! रेखा प्रजापति - अहमदाबाद  03/12/2020

शीर्षक :- काश ऐसा हो पाता ✍️ Hema Bajpai , Ahemdabad

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 काश जागने की तरह  हमारे पास सोने की भी  कोई वजह होती,   एक अरसा हो गया रात को सोए हुए.  जो नहीं है मेरे पास   वो नहीं है  सिर्फ इतनी सी बात समझ में क्यों नहीं आती मुझे.  वो सुबह ख्याल था जो सुबह आया,   रात का ख्याल रात को आता कहां है  ख्याल ही तो हे वो भी  सो जाता है.  दिल तो बहुत करता है मेरा कि रुक जाऊ,  मेरे हिस्से की जमीन भी तो मिले कि मैं ठहर जाऊं,  हर किसी की जमीन पर थोड़ी ना रुक जाऊं.  शायद ये वक्त भी उस गुजरे हुए वक्त की तरह गुजर जाएगा  जो गुजर गया  मैं वक्त थोड़ी हूं जो गुजर जाऊं.  काश हमें भी लोगों की तरह जीना आता,  काश ऐसा हो पाता.   मेरे हिस्से का सुकून लिखना भूल गया  या फिर लिखना जरुरी ना समझा,  काश वो ये मुझे भी समझा पाता.  काश ऐसा हो पाता. 🌼🌼🌼🌼 Hema Bajpai Ahemdabad

शीर्षक : हां, मैं थोड़ी अजीब सी हूं ✍️ रेखा प्रजापति , अहमदाबाद , 24/08/2020

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मैं बादलों से डरती हूं, बरसात पर मैं मरती हूं | जब हवाओं के संग उड़ती हूं, तब भी जमी से जोड़ के चलती हूं |               हां, मैं थोड़ी अजीब सी हूं l  कभी सागर की चट्टान हूं, कभी रेत बन के किनारों से जा मिलते हूं l मैं इंद्रधनुष की बेला हूं मैं हर घड़ी रंग बदलते हूं               हां, मैं थोड़ी अजीब सी हूं l  जो बात मुझे सताए मैं तंग उसी को करती हूं, कल रूठ गई थी जिस बात पर,आज पसंद उसी को करते हो l                हां, मैं थोड़ी अजीब सी हूं l   बिन कहे कुछ कहती हूं ,बिन सुने सब समझती हूं l  बात है बस इतनी सी तो हर बार तुमसे कहती हूं l                हां, मैं थोड़ी अजीब सी हूं l  रेखा प्रजापति  अहमदाबाद  24/08/2020 👉 ऐसे ही अनेक लेख और कविता के पठन के लिए नीचे की लिंक को क्लीक करे। laganinorangmnch.blogspot.com

खुद से मिल रही हूं ✍️ Hema Bajpai , Ahemdabad

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  बड़े दिनों से खुद से बातें कर रही हूं,   खुद में  गुम  हूं और खुद से ही मिल रही हूं.  ये मैं ही तो हूं जो मुझको हंसाती हूं,  मेरे हर  जीत पर पीठ थपथपाती हुं,  गम में भी अपने साथ चल रही हूं,  खुद में गुम हूं और खुद से ही मिल रही हूं.  कोई है जो मुझे हर कमी बताता है,  कोने-कोने से मुझे हीरा बनाता है,  मैं अपनी जोहरी हूं जो खुद को तराश रही हूं,  खुद में गुम हूं और खुद से ही मिल रही हूं  धड़कने जब  बढ़ती है तो खुद को होसला देती हूं,  मेरे दिल में बस मेरा मन रहता है,   इश्क है खुद से बेपरवाह बन रही हूं, खुद में गुम हूं और खुद से ही  मिल रही हूं.  मैं ताकत हूं मेरी हूं अपना  सहारा भी,  मैं  खुद ही में सागर हूं और किनारा भी,  हवाओ पर चलकर लहर बन रही हूं,  खुद में ही गुम हूं और खुद से ही मिल रही हूं.  ये  अलग ही नशा है जो खुद से मिला है,  कोई है जो मुझ पर गर्व कर रहा है,   शुन्य  से निकलकर  संपूर्ण बन रही हूं,  खुद में गुम हूं और खुद से ही ...