शिर्षक :- पुकार ✍️ रेखा पटेल "सखी" , मांजलपुर , बरोडा।
बारिश बारिश करते हो, कैसे बरसे बारिश? पैड पौंधोका जीवन लिया, क्युं न रुठे बारिश? विकास के नाम किया, सफाया जंगलका, सडकके नाम पर किया, सफाया पहाडोका, क्युं न रुठे बारिश? आदमीने मानवता छोडी, अमीरोने दानवीरता छोडी, क्युं न रुठे बारिश? धरतीको फोडकर, पातालसे लिया पानी, कुदरतसे छेड़खानी, करता आदमी, क्युं न रुठे बारिश? खेत खलियान खाली है, कुवा, तालाब खाली है, नदियां कंकर दिखाती है, क्युं न रुठे बारिश? कैसे मनाए हम रुठे हुएको, छोड दिया प्रकृतिसे छेडखानको, दिलसे किया आराधन रबका, अब तो बरसो,जम कर बरसो। रेखा पटेल "सखी", मांजलपुर, बरोडा।