खुद से मिल रही हूं ✍️ Hema Bajpai , Ahemdabad
बड़े दिनों से खुद से बातें कर रही हूं,
खुद में गुम हूं और खुद से ही मिल रही हूं.
ये मैं ही तो हूं जो मुझको हंसाती हूं,
मेरे हर जीत पर पीठ थपथपाती हुं,
गम में भी अपने साथ चल रही हूं,
खुद में गुम हूं और खुद से ही मिल रही हूं.
कोई है जो मुझे हर कमी बताता है,
कोने-कोने से मुझे हीरा बनाता है,
मैं अपनी जोहरी हूं जो खुद को तराश रही हूं,
खुद में गुम हूं और खुद से ही मिल रही हूं
धड़कने जब बढ़ती है तो खुद को होसला देती हूं,
मेरे दिल में बस मेरा मन रहता है,
इश्क है खुद से बेपरवाह बन रही हूं,
खुद में गुम हूं और खुद से ही मिल रही हूं.
मैं ताकत हूं मेरी हूं अपना सहारा भी,
मैं खुद ही में सागर हूं और किनारा भी,
हवाओ पर चलकर लहर बन रही हूं,
खुद में ही गुम हूं और खुद से ही मिल रही हूं.
ये अलग ही नशा है जो खुद से मिला है,
कोई है जो मुझ पर गर्व कर रहा है,
शुन्य से निकलकर
संपूर्ण बन रही हूं,
खुद में गुम हूं और खुद से ही मिल रही हूं.
Hema Bajpai
Ahemdabad

Osssmmm poetry....very very nice
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