Posts

Showing posts from March 1, 2021

शीर्षक : कुछ ही देरी है | ✍️ रेखा प्रजापति - अहमदाबाद

Image
आज कदमों में कुछ तेजी है |  आज सांसे भी कुछ गहरी है |  दोपहर से आंखें राह तक रही है |  उसके आने में अब कुछ ही देरी है |  आज धड़कनों को भी कुछ जल्दी है|  बेवजह चेहरे पर मुस्कान बिखरी है|  शाम से नजर दरवाजे पर टिकी है| उसके आने में अब कुछ ही देरी है | आज खाने की थाली कुछ ज्यादा भरी है| कई दिनों से हथेली ठिठुर रही है | खामोश रात हमसे कुछ कह रही है | उसके आने में अब कुछ ही देरी है |   रेखा प्रजापति  अहमदाबाद  2/3/2021