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Showing posts from July 31, 2020

शीर्षक :- दोस्ती ✍️ मीनाक्षी त्रिवेदी, 'मौनी' वडोदरा।

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मिली हम चारों सहेलियां,  सालों के बाद,  संभव हुआ मिलना, फेसबुक के जरिए।  वो बचपन के किस्से,  लढना झगडना! एक दूजे से किट्टा बुट्टा करना, फिर परीक्षा में पढना साथ साथ,  सब गपशप की, पता भी न चला, कब सुबह हुई ... हम तीन सहेलियों का,  संसार  था बढिया,  चौथी सहेली वर्षा की  हालत  कूछ ठीक नहीं थी। पैसे की तंगी, तनखाह कम, बच्चे को पढा नहीं सकती थी।  बात थी चिंतित होने की,  हम तीनोंने मिलकर, कुछ फंड किया इकठ्ठा,  बेटे की पढाई पूरी करवाई, डॉक्टर बनके जब वो, बढिया प्रैक्टिस करने लगा,  तो शाता मिली ह्रदय को!! दोस्ती तो होती है ऐसी। बस प्यार  ही प्यार!!!           🌹🌹 मीनाक्षी त्रिवेदी, 'मौनी' वडोदरा। 👉 ऐसे ही अनेक लेख और कविता के पठन के लिए नीचे की लिंक को क्लीक करे। laganinorangmnch.blogspot.com

शीर्षक :- चाहत ✍️ रेखा पटेल "सखी"...मांजलपुर , बरोडा।

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मैं तुजसे मांगु ये मेरी आदत नहीं है, जानता है सबकुछ, तु मेरी चाहत नहीं है। प्यार किया है तुजसे, दिलकी तडपन भी है, दिलकी धडकना जोरोसे, तु मेरी आहट नहीं है। होले होले से आती है जिंदगीकी नाव किनारे, तूफान से टकराती है, तु मेरी मझधार नहीं है। मांगनेसे कुछ पाना ये मेरी शिकायत नहीं है, रबने दिया है सबकुछ, ये मेरी हकीकत नहीं है। क्या खोया, क्या पाया ये दुनियावालो के लिए है, मेरा बस एक ख्वाब है, ये मेरी गरज नहीं है। रबको भी आके बोलना पड़ता है अपने बंदेसे, तु जानता नहीं है, फिर भी ये तेरी अक्कल नहीं है। सूमसाम पडा है ये महल ओर रास्ते, कोई चहल-पहल नहीं है, फिर भी ये मेरा शहर नहीं है। जिंदगीके कैसे कैसे अनजान मोड पर खडी हुं मैं, किस ओर जाती हुं मैं, ये मेरी तकदीर नहीं है। हाथ उठता है मेरा रबकी बंदगी के लिए, मेरी बंदगी कबुल हुई या नहीं, ये मेरी कसम नहीं है। रेखा पटेल "सखी" मांजलपुर, बरोडा। 👉 ऐसे ही अनेक लेख और कविता के पठन के लिए नीचे की लिंक को क्लीक करे। laganinorangmnch.blogspot.com

शीर्षक :- मां ✍️ Hema Bajpai..Ahemdabad

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 बचपन से अब तक कितना बदल गया है सब,  लेकिन मां की फिक्र ना बदली  अब तक.....  स्कूल से कॉलेज कॉलेज से नौकरी तक का सफर   उलझनो से भरा था,  लेकिन उलझनो से परे मां की  मुस्कुराहट ना बदली आज तक....  तबीयत खराब होने पर  हाल तो हर कोई पूछ लेता है,  पर तबीयत खराब  होने से पहले दवा लेने की सलाह सिर्फ मां देती है......   बोलकर भी कोई न सुनता है मुझे,   पर ना बोलकर भी चेहरा पढ़ लेती है मां....  सच में  मां से बड़ा डाक्टर आजतक ना देखा...  हाथ पकड़ कर दुनिया दिखाने का ख्वाब  बेशक पिता पूरा करते  है,  पर हाथ छोड़ कर भी ना छोड़ने का फर्ज मां  अदा करती है......  सचमुच,            बचपन से अब तक            कितना कुछ बदल गया पर    मां की फिक्र ना बदली आज तक..... Hema Bajpai Ahemdabad 👉 ऐसे ही अनेक लेख और कविता के पठन के लिए नीचे की लिंक को क्लीक करे। laganinorangmnch.blogspot.com