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Showing posts from July 30, 2020

शीर्षक :- मैंने जीना सीख लिया । ✍️ नलिनी पंड्या "नंदिनी"✍️

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हर हाल में जीना शीख लिया, जीवन की हर डगर पर, आये चाहे धूप छांव।  हो चाहे फूलों की डगर, चाहे रास्ते में हो कांटे, हर हाल में जीना सीख लिया  । संतोष से जिया है आज तक, सब कुछ सबको नहीं मिलता, वह सत्य मैंने स्वीकार लिया । चाहे तन से और धन से नहीं, पर मन मेरा मजबूत है । भरोसा है अपने ईश्वर पर, सत्य की राह पर चलना है।  यह प्रण मैंने ले लिया है । हर हाल में  जीना सीख लिया मैंने हर हाल में जीना सीख लिया ।। नलिनी पंड्या "नंदिनी"✍🏻 👉  naliniapandya@gmail.com 👉 उपर फोटो में जो लिखा हुआ है वो लेखक के अपने विचार है... इसमें ब्लॉग जवाबदार नहीं है.. और ना होगा  👉 ऐसे ही अनेक लेख और कविता के पठन के लिए नीचे की लिंक को क्लीक करे। laganinorangmnch.blogspot.com

शीर्षक :- जींदगी ✍️ --हर्षद रावल

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      जींदगी तेरी अजीब कहानी     प्यासा कोई एक बुंदका                          किसीको मारे पानी....जींदगी     जुदाई की आग में जलनेवाले     मिलन  में जलकर मरनेवाले                          परवानो की कहानी...जींदगी     बचपन में नादानी ने मारा     तो मांगी हमने जवानी     जवानी की नस नस में पाई     मुहोब्बत की रवानी...     करके   मुहोब्बत हुए फ़ना     तो लगती है तू फ़ानी.....  ...जींदगी     चीता पर तो क्या जीते जी     जलन पर न डाला पानी     अधबनी आशा को लेकर भटके     आत्मा तू भूतो की कहानी..... ...जींदगी                                      --हर्षद रावल 👉 ऐसे ही अनेक लेख और कविता के...

शीर्षक :- इश्क़ ✍️ हेमांगी शर्मा

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जालिम, बेदर्द, रूहानी, पागलपन, जब तु याद आए तेरे साथ ये सारे नाम जुड जाएं. जब सांस लेती हूं, मेरे जे़हन में तु बस जाता है, मोम सा ये तन मेरा, तेरे इश्क़ की आंच से पिघल जाता है. रूहानी करते करते रूह मे बस जाते हो, इस कदर दिल के तार जन जना जाते हो. जब तु मुझे इश्क़ की निगाहों से देखता है, मेरे अलफाज सुख जाते है, देख तेरी मुस्कान को, मेरे सुखे लबों पे फूल खिल जाते है. सतरंगी से सपने निंद सजाती है, यादों की चद्दर ताने वो सो जाती है, हल्का हल्का सा दर्द सिनें मे उठता है, जब तु मेरे इश्क़ का जोला छोडकर चला जाता है. हेमांगी शर्मा  👉 વધારે રસપ્રદ રચનાઓ ના વાચન માટે નીચે આપેલ લિંક ઉપર ક્લીક કરો . 👉 ऐसे ही अनेक लेख और कविता के पठन के लिए नीचे की लिंक को क्लीक करे। laganinorangmnch.blogspot.com

शीर्षक : बारिश ✍️ दीक्षिता शाह "दीव".

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हवा की शाखों पे मैने तेरी यादो के कुछ टूटे हुए    लम्हे रखे हे ... काश बारिश से पहले की तेज हवा आकर उसे तोड़ दे.. और फिर चंद बारिश की बुँदे उसे बहा ले जाए  ..... दूर.... बहोत दूर.... तेरे सीने के करीब तक.... या फिर उस आसमान तक जहा एक पथ्थर का खुदा भी रहता हे!!! दिल की जमीं पे ये अहसासों का कारवाँ मुझसे संभलता नहीं हे!!!....                                दीक्षिता शाह                           "दीव". 👉 ऐसे ही अनेक लेख और कविता के पठन के लिए नीचे की लिंक को क्लीक करे। laganinorangmnch.blogspot.com

शीर्षक :- गगन.... ✍️ दक्षा ठाकर, 'दक्षु' अमदावाद।

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आज गगन ने जो समझाया , नहीं  कहूँगी,नहीं कहूँगी। भीतरका जो रुप बताया, नहीं कहूँगी नहीं कहूँगी !! अनायास कुछ मिला, समझो, बहुत अधिक मिला, आज गगन ने क्या समझाया!! नहीं कहूँगी,,,,  नहीं कहूँगी । दक्षा ठाकर, 'दक्षु' अमदावाद। 👉 ऐसे ही अनेक लेख और कविता के पठन के लिए नीचे की लिंक को क्लीक करे। laganinorangmnch.blogspot.com