शीर्षक :- मैंने जीना सीख लिया । ✍️ नलिनी पंड्या "नंदिनी"✍️
हर हाल में जीना शीख लिया, जीवन की हर डगर पर, आये चाहे धूप छांव। हो चाहे फूलों की डगर, चाहे रास्ते में हो कांटे, हर हाल में जीना सीख लिया । संतोष से जिया है आज तक, सब कुछ सबको नहीं मिलता, वह सत्य मैंने स्वीकार लिया । चाहे तन से और धन से नहीं, पर मन मेरा मजबूत है । भरोसा है अपने ईश्वर पर, सत्य की राह पर चलना है। यह प्रण मैंने ले लिया है । हर हाल में जीना सीख लिया मैंने हर हाल में जीना सीख लिया ।। नलिनी पंड्या "नंदिनी"✍🏻 👉 naliniapandya@gmail.com 👉 उपर फोटो में जो लिखा हुआ है वो लेखक के अपने विचार है... इसमें ब्लॉग जवाबदार नहीं है.. और ना होगा 👉 ऐसे ही अनेक लेख और कविता के पठन के लिए नीचे की लिंक को क्लीक करे। laganinorangmnch.blogspot.com