शीर्षक : हां, मैं थोड़ी अजीब सी हूं ✍️ रेखा प्रजापति , अहमदाबाद , 24/08/2020
मैं बादलों से डरती हूं, बरसात पर मैं मरती हूं | जब हवाओं के संग उड़ती हूं, तब भी जमी से जोड़ के चलती हूं |
हां, मैं थोड़ी अजीब सी हूं l
कभी सागर की चट्टान हूं, कभी रेत बन के किनारों से जा मिलते हूं l
मैं इंद्रधनुष की बेला हूं मैं हर घड़ी रंग बदलते हूं
हां, मैं थोड़ी अजीब सी हूं l
जो बात मुझे सताए मैं तंग उसी को करती हूं,
कल रूठ गई थी जिस बात पर,आज पसंद उसी को करते हो l
हां, मैं थोड़ी अजीब सी हूं l
बिन कहे कुछ कहती हूं ,बिन सुने सब समझती हूं l
बात है बस इतनी सी तो हर बार तुमसे कहती हूं l
हां, मैं थोड़ी अजीब सी हूं l
रेखा प्रजापति
अहमदाबाद
24/08/2020
👉 ऐसे ही अनेक लेख और कविता के पठन के लिए नीचे की लिंक को क्लीक करे।
laganinorangmnch.blogspot.com

Comments
Post a Comment