शीर्षक :- चाहत ✍️ रेखा पटेल "सखी"...मांजलपुर , बरोडा।
मैं तुजसे मांगु ये मेरी आदत नहीं है,
जानता है सबकुछ, तु मेरी चाहत नहीं है।
प्यार किया है तुजसे, दिलकी तडपन भी है,
दिलकी धडकना जोरोसे, तु मेरी आहट नहीं है।
होले होले से आती है जिंदगीकी नाव किनारे,
तूफान से टकराती है, तु मेरी मझधार नहीं है।
मांगनेसे कुछ पाना ये मेरी शिकायत नहीं है,
रबने दिया है सबकुछ, ये मेरी हकीकत नहीं है।
क्या खोया, क्या पाया ये दुनियावालो के लिए है,
मेरा बस एक ख्वाब है, ये मेरी गरज नहीं है।
रबको भी आके बोलना पड़ता है अपने बंदेसे,
तु जानता नहीं है, फिर भी ये तेरी अक्कल नहीं है।
सूमसाम पडा है ये महल ओर रास्ते,
कोई चहल-पहल नहीं है, फिर भी ये मेरा शहर नहीं है।
जिंदगीके कैसे कैसे अनजान मोड पर खडी हुं मैं,
किस ओर जाती हुं मैं, ये मेरी तकदीर नहीं है।
हाथ उठता है मेरा रबकी बंदगी के लिए,
मेरी बंदगी कबुल हुई या नहीं,
ये मेरी कसम नहीं है।
रेखा पटेल "सखी"
मांजलपुर,
बरोडा।
👉 ऐसे ही अनेक लेख और कविता के पठन के लिए नीचे की लिंक को क्लीक करे।
laganinorangmnch.blogspot.com

Comments
Post a Comment