शीर्षक :- जींदगी ✍️ --हर्षद रावल
जींदगी तेरी अजीब कहानी
प्यासा कोई एक बुंदका
किसीको मारे पानी....जींदगी
जुदाई की आग में जलनेवाले
मिलन में जलकर मरनेवाले
परवानो की कहानी...जींदगी
बचपन में नादानी ने मारा
तो मांगी हमने जवानी
जवानी की नस नस में पाई
मुहोब्बत की रवानी...
करके मुहोब्बत हुए फ़ना
तो लगती है तू फ़ानी..... ...जींदगी
चीता पर तो क्या जीते जी
जलन पर न डाला पानी
अधबनी आशा को लेकर भटके
आत्मा तू भूतो की कहानी..... ...जींदगी
--हर्षद रावल
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