शीर्षक : बारिश ✍️ दीक्षिता शाह "दीव".
हवा की शाखों पे मैने
तेरी यादो के कुछ टूटे हुए
लम्हे रखे हे ...
काश बारिश से पहले की
तेज हवा आकर उसे तोड़ दे..
और फिर चंद बारिश की बुँदे
उसे बहा ले जाए .....
दूर....
बहोत दूर....
तेरे सीने के करीब तक....
या फिर उस आसमान तक
जहा एक पथ्थर का खुदा भी रहता हे!!!
दिल की जमीं पे ये अहसासों का
कारवाँ मुझसे संभलता नहीं हे!!!....
दीक्षिता शाह
"दीव".
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Mene bhi jina shikh liya chahe jamana kitana julma gyjare har hal me tufan se takarana sikh liya ak bhagavan pae bharosa rakhana sikh liya
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