शीर्षक :- काश ऐसा हो पाता ✍️ Hema Bajpai , Ahemdabad
काश जागने की तरह
हमारे पास सोने की भी कोई वजह होती,
एक अरसा हो गया रात को सोए हुए.
जो नहीं है मेरे पास
वो नहीं है
सिर्फ इतनी सी बात समझ में क्यों नहीं आती मुझे.
वो सुबह ख्याल था जो सुबह आया,
रात का ख्याल रात को आता कहां है
ख्याल ही तो हे वो भी सो जाता है.
दिल तो बहुत करता है मेरा कि रुक जाऊ,
मेरे हिस्से की जमीन भी तो मिले कि मैं ठहर जाऊं,
हर किसी की जमीन पर थोड़ी ना रुक जाऊं.
शायद ये वक्त भी उस गुजरे हुए वक्त की तरह गुजर जाएगा
जो गुजर गया
मैं वक्त थोड़ी हूं जो गुजर जाऊं.
काश हमें भी लोगों की तरह जीना आता,
काश ऐसा हो पाता.
मेरे हिस्से का सुकून लिखना भूल गया
या फिर लिखना जरुरी ना समझा,
काश वो ये मुझे भी समझा पाता.
काश ऐसा हो पाता.
🌼🌼🌼🌼
Hema Bajpai
Ahemdabad

Super poem.
ReplyDeleteOsssmmmm poetry
ReplyDelete