शीर्षक :- गगन.... ✍️ दक्षा ठाकर, 'दक्षु' अमदावाद।



आज गगन ने जो समझाया ,
नहीं  कहूँगी,नहीं कहूँगी।
भीतरका जो रुप बताया,
नहीं कहूँगी नहीं कहूँगी !!
अनायास कुछ मिला,
समझो, बहुत अधिक मिला,
आज गगन ने क्या समझाया!!
नहीं कहूँगी,,,,  नहीं कहूँगी ।

दक्षा ठाकर, 'दक्षु' अमदावाद।


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