शीर्षक :- इश्क़ ✍️ हेमांगी शर्मा




जालिम, बेदर्द, रूहानी, पागलपन,
जब तु याद आए तेरे साथ ये सारे नाम जुड जाएं.

जब सांस लेती हूं,
मेरे जे़हन में तु बस जाता है,
मोम सा ये तन मेरा,
तेरे इश्क़ की आंच से पिघल जाता है.

रूहानी करते करते रूह मे बस जाते हो,
इस कदर दिल के तार जन जना जाते हो.

जब तु मुझे इश्क़ की निगाहों से देखता है,
मेरे अलफाज सुख जाते है,
देख तेरी मुस्कान को,
मेरे सुखे लबों पे फूल खिल जाते है.

सतरंगी से सपने निंद सजाती है,
यादों की चद्दर ताने वो सो जाती है,
हल्का हल्का सा दर्द सिनें मे उठता है,
जब तु मेरे इश्क़ का जोला छोडकर चला जाता है.

हेमांगी शर्मा 

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Comments

  1. वाह वाह वाह वाह

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